पत्रकार रईस अहमद हत्याकाण्ड के आरोपी पत्नी और पत्नी के प्रेमी को आजीवन कारावास, T I अमित कश्यप ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में निभाई थी अहम भूमिका

Saroj Sahu: महेंद्रगढ़ चिरमिरी (MCB) : 4 नवंबर 2025,पत्रकार रईस अहमद हत्याकाण्ड का फैसला आ गया.विवेक कुमार तिवारी प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मनेंद्रगढ़ की अदालत की अदालत ने सुनाया फैसला , प्रेमी व विधि से संघर्षरत किशोर के साथ मिलकर पत्नी ने हत्या की साजिश रची थी की थी पति की हत्या. मामले पर न्यायालय ने अपराध कारित करने का जुर्म साबित होने पर प्रेमी/प्रेमिका को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है .कोतवाली मनेंद्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत चनवारीडांड में 16 मई 2024 को घटना हुई थी,तब जांच कर्ता स्वयं T I अमित कश्यप उस थाना प्रभारी थे, उन्होंने बिना देरी किए जिम्मेदारी से घटना के बाद तत्काल जांच की और पीड़िता को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

क्या है न्यायालय का निर्णय :-

न्यायालय का निर्णय कई पन्नो पर है लेकिन हम आपको मेन खबर बताते हैं कि लिखा है जज की कलम से कि :-यह सही है कि अभि.गण के पूर्व से अपराधी होने के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं है एवं वह लगभग डेढ़ वर्ष से अभिरक्षा में है किन्तु केवल यही कारण उनके प्रति नरम दृष्टिकोण रखने के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह प्रकरण विवाह के पश्चात् स्थापित किये गये अवैध संबंधों का परिणाम होकर स्वयं के पति की हत्या करने से संबंधित है एवं वर्तमान में इस प्रकृति के अपराधों की संख्या हो रही अत्यधिक वृद्धि से इन अपराधों पर नरम दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं है।

T I अमित कश्यप ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में निभाई थी अहम भूमिकाविवेचक टी आई अमित कश्यप हैं

अपराध की प्रकृति व अन्य समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत् रखते

हुए अभियुक्ता सफीना एवं आरजू खान दोनों अभि, गण को धारा-120-बी भा.दं.सं. में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व रु. 500/- (पाँच सौ रु.) अर्थदण्ड, धारा-449/34 भा.दं.सं. में आजीवन कारावास व रु. 500/- (पाँच सौ रु.) अर्थदंड, धारा-302/34 भा.दं.सं. में आजीवन कारावास व रु. 500/- (पांच सौ रु.) अर्थदंड एवं 201/34 भा.दं.सं. में 07 वर्ष का सश्रम काराबास व रू.-500/- (पाँच सौ रू.) अर्थदण्ड से दंडित किया जाता है। अर्थदण्ड की अदायगी में व्यतिक्रम किये जाने पर दोनों अभि. गण को धारा-120 बी भा.दं.सं. में 01 वर्ष, धारा-449/34 भा.दं.सं. में 05 वर्ष धारा-302/34 भा.दं.सं. में 05 वर्ष एवं धारा-201/34 भा.दं.सं. में 02 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताया जाये। अभि,गण की सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी। अभि.गण द्वारा अभिरक्षा में व्यतीत की गयी अवधि उसके दण्डादेश में समायोजित की जायेगी।

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