तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारों को यह समझ प्रदान करना है कि छत्तीसगढ़ ने अपनी जीवंत जनजातीय परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ किस प्रकार समन्वित किया

नई दिल्ली से प्रिंट, टेलीविज़न और डिजिटल मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों से युक्त एक राष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल आज तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुँचा। यह दौरा भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा आयोजित किया गया है। इस भ्रमण का उद्देश्य राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, विरासत और भारत तथा राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए की जा रही विकासात्मक पहलों को प्रदर्शित करना है।दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल बुधवार, 12 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात करेगा। इस अवसर पर जनजातीय कल्याण, आजीविका सृजन और समावेशी विकास से संबंधित विभिन्न नीतियों एवं कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। प्रतिनिधिमंडल शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का भी दौरा करेगा, जो भारत के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता और बलिदान की गाथा को मूर्तिकला, कला और डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारों को यह समझ प्रदान करना है कि छत्तीसगढ़ ने अपनी जीवंत जनजातीय परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ किस प्रकार समन्वित किया है। दौरे में प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों, समुदाय प्रतिनिधियों और स्थानीय उद्यमियों से भी संवाद करेगा, जो जनजातीय सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवम्बर 2023 को राष्ट्र को समर्पित किया था, देशभर में स्थापित किए जा रहे 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों में से एक है। इस संग्रहालय में 650 से अधिक मूर्तियाँ और डिजिटल स्टोरीटेलिंग तकनीक के माध्यम से ऐतिहासिक जनजातीय आंदोलनों — हल्बा विद्रोह, पारलकोट आंदोलन, भूमकाल क्रांति — तथा महिला नेतृत्व वाले रानी चो-रिस आंदोलन जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है।बुधवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात में राज्य सरकार की जनजातीय कल्याण, कौशल विकास, आजीविका संवर्द्धन और समावेशी शासन से जुड़ी पहलों पर चर्चा की जाएगी। इसके पश्चात पत्रकार संग्रहालय का भ्रमण करेंगे, जहाँ वे छत्तीसगढ़ की कला, इतिहास और जनजातीय परंपराओं की झलक प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे।अगले दिन, गुरुवार, 13 नवम्बर को प्रतिनिधिमंडल बलौदा बाजार जिले के गिरोधपुरी का दौरा करेगा, जो जनजातीय समाज के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ प्रतिनिधिमंडल का स्वागत जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद वे गिरोधपुरी जनजातीय सांस्कृतिक एवं आजीविका विरासत कॉरिडोर का भ्रमण करेंगे — यह पहल पारंपरिक आजीविकाओं, सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत-आधारित पर्यटन को एकीकृत करने की दिशा में अग्रसर है।इस दौरान पत्रकार जनजातीय स्व-सहायता समूहों (Self-Help Groups), कारीगरों और युवा उद्यमियों से सीधे संवाद करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि किस प्रकार पारंपरिक कौशल और आधुनिक अवसरों का मेल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा है।भ्रमण के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन का दौरा करेगा — यह एक खुला संग्रहालय है जहाँ जनजातीय घरों, कलाओं और पारंपरिक जीवनशैली के जीवंत मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं। यह स्थल छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय विरासत का सजीव परिचय कराता है। तीन दिवसीय कार्यक्रम के उपरांत प्रतिनिधिमंडल रायपुर से नई दिल्ली लौटेगा।यह मीडिया आउटरीच कार्यक्रम भारत सरकार के उस सतत प्रयास का हिस्सा है जिसके अंतर्गत देश के जनजातीय समुदायों के योगदान, संस्कृति और विकास यात्रा को राष्ट्रीय पटल पर लाया जा रहा है। ‘आदि संस्कृति परियोजना’ तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा संरक्षण मंच ‘आदि वाणी’ जैसी पहलें मुंडारी, भीली और गोंडी जैसी जनजातीय भाषाओं के संरक्षण हेतु कार्यरत हैं। इसी प्रकार ‘आदि महोत्सव’ और जनजातीय डिजिटल दस्तावेज भंडार जैसी राष्ट्रीय योजनाएँ जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, गरिमा और डिजिटल समावेशन को सशक्त बना रही हैं।यह दौरा भारत सरकार की उस समग्र दृष्टि को रेखांकित करता है जिसके अंतर्गत जनजातीय समुदायों को सांस्कृतिक संरक्षण, नवाचार और सतत विकास के माध्यम से सशक्त बनाते हुए उन्हें राष्ट्र की प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, ताकि भारत के प्रथम नागरिकों की गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहे।

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