बस्तर में आदिवासी बेटियों से गैर-आदिवासियों के विवाह का मुद्दा गरमाया, यतेन्द्र ‘छोटू’ सलाम ने उठाई आवाज,कहा- संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार बनाए स्पष्ट नीति

बस्तर। बस्तर में आदिवासी समाज की बेटियों के गैर-आदिवासी समाज में विवाह का मुद्दा अब जोर पकड़ता नजर आ रहा है। आदिवासी युवा नेता यतेन्द्र ‘छोटू’ सलाम ने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन से गंभीरता से विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विवाह के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के अधिकारों और राजनीतिक हितों पर किसी भी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।यतेन्द्र ‘छोटू’ सलाम ने कहा कि बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा आज सबसे महत्वपूर्ण विषय है। आदिवासी समाज की बेटियों के गैर-आदिवासी समाज में विवाह के मामलों को लेकर समाज में चिंता है।ऐसे मामलों में सरकार को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।उन्होंने मांग की कि आदिवासी महिला के गैर-आदिवासी से विवाह के बाद उसके और उससे जन्मे बच्चों को अनुसूचित क्षेत्रों में मिलने वाले मताधिकार, भूमि अधिकार तथा अन्य पंजीयन संबंधी अधिकारों की कानूनी स्थिति की स्पष्ट समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में भावनात्मक नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर स्पष्ट नीति बनाए जाने की आवश्यकता है।‘बस्तर सिर्फ जमीन नहीं, आदिवासी समाज की पहचान है’सलाम ने कहा कि बस्तर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान की धरती है। यहां के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।उन्होंने सरकार से मांग की कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज को प्राप्त संवैधानिक संरक्षण के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था का ऐसा दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, जिससे आने वाले समय में बस्तर के आदिवासी समाज के अधिकार और हित प्रभावित हों।‘आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज उठाता रहूंगा’यतेन्द्र ‘छोटू’ सलाम ने कहा कि बस्तर की अस्मिता, आदिवासी समाज के अधिकार और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे आगे भी लगातार आवाज उठाते रहेंगे और सरकार से इस पर गंभीर पहल की मांग करेंगे।

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